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तन शांति का अनुभव करे, मन शांति का अनुभव करे

4.2
176

मस्तिस्क की विव्हल तरंगों में शांत रस भर दें, नयनों की अंजुली में प्रेम-सुधा-रस पान कर दे, वक्षस्थल में अनुपम शांति का निर्वहन हो, द्वन्दातित बन अभितज्य बनूँ, समग्र देह में शिरोत्पाद शांति का वरण हो,...

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लेखक के बारे में
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सुरेश चौधरी

जमशेदपुर में जन्मे सुरेश जी शिक्षा से विज्ञानं में स्नातक एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं वे वित्तीय विश्लेषण के विशेषग्य हैं, शिक्षा समाप्त कर उन्होंने ५ वर्ष कार्य किया फिर उन्होंने अपना उद्योग लगाया सफल उद्योगपति के रूप में पहचान बनाई, स्वास्थ की वजह से वे उद्योग से किनारा कर लिए एवं प्रतिष्ठित आद्यौगिक समूहों के विशिष्ठ सलाहकार हो गए ,उन्हें इस्पात के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु ,नयी दिल्ली की एक प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्था द्वारा भारत गौरव से सम्मानित किया गया , यूँ तो साहित्य के प्रति उनकी रूचि बचपन से ही रही, परन्तु लिखना गत ५ वर्षों से ही किया ,इस छोटे से समय में उन्होंने धर्म-अध्यात्म पर तीन पुस्तकें लिखी एवं अन्य ५ संयुक्त संकलन में उनकी रचनाये प्रकाशित हुई, कई विख्यात पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं, नवोदित रचनाकारों को मुख्य धारा में लेन हेतु उन्होंने शुक्तिका प्रकाशन की स्थापना की एवं दृढ़ मनो शक्ति का परिचय देते हुए उड़ान एक अनुभूति साहित्यिक परावारिक पत्रिका का आरम्भ किया |

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    01 जुलाई 2020
    aise to duniya vaikunth ban jayegi
  • author
    Saroj bala Shukla
    10 जुलाई 2020
    good
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    16 अगस्त 2019
    सुन्दर अभिव्यक्ति ।
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    Manjit Singh
    01 जुलाई 2020
    aise to duniya vaikunth ban jayegi
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    Saroj bala Shukla
    10 जुलाई 2020
    good
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    अरविन्द सिन्हा
    16 अगस्त 2019
    सुन्दर अभिव्यक्ति ।