बचपन में जब सुनते थे हम, नानी से परियों की कहानी सुंदर-सुंदर पंखों वाली, नीली नीली आंखों वाली आकाश में उड़ने वाली, सुंदर परियों की रानी, सुनते सुनते आती थी जब निंदिया रानी परी लोक की सुंदर दुनिया ...
सेवा निवृत प्रधानाचार्य हूं। साहित्यिक अभिरुचि के कारण सन् २००० से विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। 'अहिंसा आज भी प्रासंगिक है' २५६ प्रष्ठ की एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है।
सारांश
सेवा निवृत प्रधानाचार्य हूं। साहित्यिक अभिरुचि के कारण सन् २००० से विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। 'अहिंसा आज भी प्रासंगिक है' २५६ प्रष्ठ की एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है।
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