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सुबह

4.5
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फ़ोन की घंटी बजते ही वर्मा जी के दिल की धड़कने बढ़ गयी , उत्सुकता भी थी और आशंका भी , क्या पता उनका क्या निर्णय होगा? वो इस रिश्ते के लिए राजी होंगे या नहीं इसी आशा निराशा के बीच , वर्मा जी ने ...

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लेखक के बारे में
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कमलाकर मिश्र

पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट , ह्रदय से कवि और लेखन में आलसी हूँ ! अक्सर कोई भाव आने पर क़लमबद्ध नहीं कर पाने की वजह से बहुत कुछ छूट जाता है

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    प्रिया सिंह "Life🧬"
    25 जुलाई 2018
    अच्छी रचना पर हक़ीक़ते से काफी दूर।ऐसे लोग होते नहीं है इस समाज में कम से कम मैंने तो नही देखा है ,यहां अच्छी खासी लड़कियों का भी विवाह बिना दहेज़ के नहीं होता ।
  • author
    Meenal Choradia
    26 अप्रैल 2019
    कहानी तो अच्छी है आदर्श प्रस्तुत करने वाली है कहानी का अंत सुखद है पर काल्पनिक है मुझे नहीं लगता कि मर्द पत्नी के साथ घटी दुर्घटना को लेकर सामान्य जीवन जीता है कई सारे केस मेरे पास आते बहुत मुश्किल होता है समझा पाना फिर भी अगर समाज में स्वीकार किया जा रहा है तो स्वागत है।5star रेटिंग है
  • author
    31 मार्च 2017
    बहुत अच्छी रचना. बडी हिम्मत चाहिए सच को स्वीकार ने की. यही हिम्मत सामाजिक परिवेश बदल सकती है.
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    प्रिया सिंह "Life🧬"
    25 जुलाई 2018
    अच्छी रचना पर हक़ीक़ते से काफी दूर।ऐसे लोग होते नहीं है इस समाज में कम से कम मैंने तो नही देखा है ,यहां अच्छी खासी लड़कियों का भी विवाह बिना दहेज़ के नहीं होता ।
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    Meenal Choradia
    26 अप्रैल 2019
    कहानी तो अच्छी है आदर्श प्रस्तुत करने वाली है कहानी का अंत सुखद है पर काल्पनिक है मुझे नहीं लगता कि मर्द पत्नी के साथ घटी दुर्घटना को लेकर सामान्य जीवन जीता है कई सारे केस मेरे पास आते बहुत मुश्किल होता है समझा पाना फिर भी अगर समाज में स्वीकार किया जा रहा है तो स्वागत है।5star रेटिंग है
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    31 मार्च 2017
    बहुत अच्छी रचना. बडी हिम्मत चाहिए सच को स्वीकार ने की. यही हिम्मत सामाजिक परिवेश बदल सकती है.