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आत्मा का रिश्ता

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बार बार छवि आंखो के सामने घूम जाती है उसकी साफ निर्मल,स्वछन्द,कोमल, बहुत बार सोचा पुकारूं उसे, कुछ देर बात करूं, पर रूक गए कदम ये सोच कर कि वो भी मसरूफ है कुछ नए रिश्ते बनाने में शायद, ये आत्मा का ...

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neeraj
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