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सोमा ( कहानी )

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सोमा     ( कहानी )                              ले०- डॉ. रंजना वर्मा                    सूरज छिपने के लिए तैयार था । शाम घिरने वाली थी । थोड़ी ही देर में अंधेरा हो जाएगा । तब तक बाहर का सब काम ...

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लेखक के बारे में
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Dr. Ranjana Verma

मेरा परिचय - नाम - डॉ. रंजना वर्मा जन्म - 15 जनवरी 1952, जौनपुर (उ0 प्र0 ) में । शिक्षा- एम. ए. (संस्कृत, प्राचीन इतिहास ) पी0 एच0 डी0 (संस्कृत) लेखन एवम् प्रकाशन - वर्ष 1967 से देश की लब्ध प्रतिष्ठ पत्र पत्रिकाओं में , हिंदी की लगभग सभी विधाओं में । कुछ रचनाएँ उर्दू में भी प्रकाशित । प्रकाशित कृतियाँ - सावन, समर्पिता, कैकेयी का मनस्ताप, वेदेही व्यथा, संविधान निर्माता , द्रुपद सुता ( सभी खण्ड काव्य ), चन्द्रमा की गोद में ( बाल उपन्यास ), समृद्धि का रहस्य , जादुई पहाड़ ( बाल कथा सन्ग्रह )। जज़्बात , ख्वाहिशें , एहसास , प्यास , रंगे उल्फ़त , गुंचा , रौशनी के दिए , खुशबू रातरानी की , ख़्वाब अनछुए (सभी ग़ज़ल संग्रह )। गीतिका गुंजन , सरगम साँसों की , रजनीगन्धा ( गीतिका संग्रह ) , सत्यनारायण कथा ( पद्यानुवाद ) । मुक्तक मुक्ता , मुक्तकांजलि , मन के मनके ( मुक्तकों का संग्रह ) । दोहा सप्तशती , दोहा मंजरी । बसंत के फूल (कुंडलिया संग्रह ) साँझ सुरमई , आ जा मेरे मीत , मीत के गीत , गीत धारा , गीत गुंजन ( गीत संग्रह) एक हवेली नौ अफ़साने, अमला , रास्ते प्यार के ( उपन्यास )।सूर्यास्त (कहानी संग्रह) प्रसारण - गीत, वार्ता, तथा कहानियों का आकाशवाणी, फैज़ाबाद से समय समय पर प्रसारण ।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shivam Bhriguvanshi
    14 जुलाई 2020
    नारी की पीड़ा को आपने बेहतरीन शब्दों से नवाजा हैं बांध कर रखने वाली कहानी👌👌 बहुत साधुवाद
  • author
    Hariom Dwivedi
    01 जुलाई 2020
    इस कहानी में आप माता सीता व माता सती का जो उल्लेख किया है वह कही न कही गलत है
  • author
    26 जून 2019
    मनुष्य की पाशविक प्रवृत्ति का कुफल मज़लूमों को भोगना पड़ता है। समाज की विद्रूपता दर्शाती समसामयिक और मार्मिक कहानी। साधुवाद एवं शुभकामनाएं।
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    Shivam Bhriguvanshi
    14 जुलाई 2020
    नारी की पीड़ा को आपने बेहतरीन शब्दों से नवाजा हैं बांध कर रखने वाली कहानी👌👌 बहुत साधुवाद
  • author
    Hariom Dwivedi
    01 जुलाई 2020
    इस कहानी में आप माता सीता व माता सती का जो उल्लेख किया है वह कही न कही गलत है
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    26 जून 2019
    मनुष्य की पाशविक प्रवृत्ति का कुफल मज़लूमों को भोगना पड़ता है। समाज की विद्रूपता दर्शाती समसामयिक और मार्मिक कहानी। साधुवाद एवं शुभकामनाएं।