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सियासत

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4.1

सियासत आदमी की सब मुहब्बत छीन लेती है,,, कि लेकर हाथ में खंजर रफ़ाकत छीन लेती है......... बहुत तकलीफ होती है मगर आदत बुरी छोडो . ,, नही तो चैन दिल का सब ये आदत छीन लेती है........... ज़बां पर थी...