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शिशिर....।

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शोलों सी जलति हवाऐँ, आज कुछ शीतल बहती हैं। श्वेत ओड़ कर आज नज़ारे, स्वर्ण छवि सी सुन्दर हैं। अंग-अंग प्रफुल्लित धरा कि, किसी दुल्हन सी खिल उठी। मेरे मन कि आज चेतना, सागर किनारे बैठी है। सूर्य हो ...

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SHIVADI MISHRA

imprinting my mindset.

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