शिरीष के फूल निबंध में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी लिखते हैं , " कालिदास सौन्दर्य के बाह्य आवरण को भेदकर उसके भीतर तक पहुँच सकते थे, दुख हो कि सुख , वे अपना भाव -रस उस अनासक्त ...

प्रतिलिपिशिरीष के फूल निबंध में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी लिखते हैं , " कालिदास सौन्दर्य के बाह्य आवरण को भेदकर उसके भीतर तक पहुँच सकते थे, दुख हो कि सुख , वे अपना भाव -रस उस अनासक्त ...