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शायरी (क्या खता हुई हमसे!)

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तूम सागर हो तो , हम लहर है तुम्‍हारी। तुम वजा हो; उसकी , जो लगी है हमें बीमारी। शायद ही कोई लम्हा हो, जब आए ना याद तुम्हारी। अब ख़ुदा ही जाने , क्या खता हुई हमसे , जो आई ना याद तुमें हमारी।      ...

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Mohan Singh
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