शुरु से ही लिखने मे रुचि थी ,पर समझ ही नहीध आया कहां से छपती हैं रचनाऐं और सच तो ये है कि मुझे बडा ही संकोच होता था किसी को अपनी रचना या लेखन के विषय मे बताने में,सो लिख-लिख कर रख लेती थी,फर समय के साथ सब सही होता चला गया,पहली बिर आठवीं मे कविता पाठ का अवसर मिला,जगदलपुर मे हमारी प्राचार्या ने मुझे हौसला दिया कि भीड से भय कभी नहीं करना उनका आशीष है जो अब तक का सफर तय हुआ,अखबारों में रेसिपी भी छपी,आकाशवाणी जगदलपुर से,आकाशवाणी बिलासपुर से और आकाशवाणी आम्बिकापुर से कुछ -ना -कुछ प्रसारित होता ही रहता है.दूरदर्शन रायपुर से मेरु एक टेलीफिल्म प्सारित हुई है,
स्कूल के बाद मैने पत्रकारिता की कुछ समय नवभिरत बिलासपुर में फिर दैनिक भास्कर बिलिसपुर में,
संगीत सरिता कोरबा से जुड़ने का मौका मिला ये सौभाग्य मुझे आदरणीय श्री जयराम साहू जय जी ने दिया,
बिलासपुर लोक समिती के साथ भी जुडने का अवसर मिला पर ये बहुत ही कम समय तक चल पाया दूर बहुत था घर से .
शादी के बाद बहुत दिनों तक लेखन छुट गया थासिर्फ डायरी तक ही सिमट के रह गया लेखन.
अभी 2004 से फिर से शुरु किया है मैने लिखना.
अभी राजभाषा छत्तीसगड़ से जुडी