कभी दिल को बहकाती शाम सी मोहब्बत तेरी तो कभी रेशमी जुल्फ़ें उलझाती मुझे, पल-पल मैं बहकता जा रहा था तेरी नशीली आँखों में बेतहाशा होकर इश्क़ की महफिलों में निहारता तुझे..... ...

प्रतिलिपिकभी दिल को बहकाती शाम सी मोहब्बत तेरी तो कभी रेशमी जुल्फ़ें उलझाती मुझे, पल-पल मैं बहकता जा रहा था तेरी नशीली आँखों में बेतहाशा होकर इश्क़ की महफिलों में निहारता तुझे..... ...