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बात इतनी सी है..

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बात दरअसल बस इतनी सी है... के क्या मैं सिर्फ इस डर से अपना हुनर छुपा के बैठा रहूँ के दुनिया में मुझसे और भी बेहतर लोग है? मुझसे और भी बेहतर काम करते हैं। मैं क्या ये सोच कर हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहूँ...

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Ankush Jain

लिखना मेरे जीवन का अहम हिस्सा है! फिलहाल बस इतना ही, बाकी अंदाज आप मेरी रचनाओं को पढ़कर लगा सकते हैँ।

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