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हिन्दी

सती

4.6
56228

मुलिया को देखते हुए उसका पति कल्लू कुछ भी नहीं है। फिर क्या कारण है कि मुलिया संतुष्ट और प्रसन्न है और कल्लू चिन्तित और सशंकित ? मुलिया को कौड़ी मिली है, उसे दूसरा कौन पूछेगा ? कल्लू को रत्न मिला है, उसके सैकड़ों ग्राहक हो सकते हैं। खासकर उसे अपने चचेरे भाई राजा से बहुत खटका रहता है। राजा रूपवान है, रसिक है, बातचीत में कुशल है, स्त्रियों को रिझाना जानता है। इससे कल्लू मुलिया को बाहर नहीं निकलने देता। उस पर किसी की निगाह भी पड़ जाय, यह उसे असह्य है। वह अब रात-दिन मेहनत करता है, जिससे मुलिया को ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : धनपत राय श्रीवास्तव उपनाम : मुंशी प्रेमचंद, नवाब राय, उपन्यास सम्राट जन्म : 31 जुलाई 1880, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) देहावसान : 8 अक्टूबर 1936 भाषा : हिंदी, उर्दू विधाएँ : कहानी, उपन्यास, नाटक, वैचारिक लेख, बाल साहित्य   मुंशी प्रेमचंद हिन्दी के महानतम साहित्यकारों में से एक हैं, आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाने वाले प्रेमचंद ने स्वयं तो अनेकानेक कालजयी कहानियों एवं उपन्यासों की रचना की ही, साथ ही उन्होने हिन्दी साहित्यकारों की एक पूरी पीढ़ी को भी प्रभावित किया और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी कहानियों की परंपरा कायम की|  अपने जीवनकाल में प्रेमचंद ने 250 से अधिक कहानियों, 15 से अधिक उपन्यासों एवं अनेक लेख, नाटक एवं अनुवादों की रचना की, उनकी अनेक रचनाओं का भारत की एवं अन्य राष्ट्रों की विभिन्न भाषाओं में अन्यवाद भी हुआ है। इनकी रचनाओं को आधार में रखते हुए अनेक फिल्मों धारावाहिकों को निर्माण भी हो चुका है।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mridul Joshi
    24 जनवरी 2018
    भारतीय संस्कृति का दर्शन कराती कथा।मुलिया ने जीते जी सतित्व की रक्षा की।
  • author
    Prem Bansal
    13 मई 2021
    नर हमेशा नारी को अपनी सम्पति समझता है और सोचता है हर नर्सरी पर उसका अधिकार है वो जैसाचाहे वैसा व्यवहार कर सकता है। मुलिया जैसी पतिव्रत नारी के सामने भी अपनी सत्यता का प्रमाण देने का प्रश्न खड़ा होता है। नारी का कोई दोष इस होने पर भी हमेशा सब की निगाह उसी से उस का चरित्र प्रमाण पत्र चाहते है,पुरुष से कोई क्यो उस से उस का चरित्र प्रमाणपत्र मांगता।
  • author
    Nirmala Choudhary
    04 अगस्त 2018
    बहुत शानदार 👌👌
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    Mridul Joshi
    24 जनवरी 2018
    भारतीय संस्कृति का दर्शन कराती कथा।मुलिया ने जीते जी सतित्व की रक्षा की।
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    Prem Bansal
    13 मई 2021
    नर हमेशा नारी को अपनी सम्पति समझता है और सोचता है हर नर्सरी पर उसका अधिकार है वो जैसाचाहे वैसा व्यवहार कर सकता है। मुलिया जैसी पतिव्रत नारी के सामने भी अपनी सत्यता का प्रमाण देने का प्रश्न खड़ा होता है। नारी का कोई दोष इस होने पर भी हमेशा सब की निगाह उसी से उस का चरित्र प्रमाण पत्र चाहते है,पुरुष से कोई क्यो उस से उस का चरित्र प्रमाणपत्र मांगता।
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    Nirmala Choudhary
    04 अगस्त 2018
    बहुत शानदार 👌👌