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सेंटाक्लाज

3.7
569

इस बार सेंटाक्लाज तुम लाना ये उपहार भर देना मानस मन मे दया भाव और प्यार झगड़े फसाद को उठाये वो हर जङ मिटा देना प्रेम अंहिसा और मैत्री भाव को हर मन मे बिठा देना अभी भी चित्कार रही उन मासूमों की पुकार...

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लेखक के बारे में
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एकता सारदा

नाम - एकता सारदा पता - सूरत (गुजरात) सम्प्रति - स्वतंत्र लेखन प्रकाशित सांझा काव्य संग्रह - अपनी-अपनी धरती , अपना-अपना आसमान , अपने-अपने सपने(2014) ektasarda3333@gmail.com

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Aditya Dubay
    25 मार्च 2021
    यह Rating लेखक के लिए नहीं प्रतिलिपि के लिए हैं। कविता को लघुकथा में स्थान देने के लिए।
  • author
    Kamlesh Barman
    11 अप्रैल 2020
    सुपर 100%शुध्द ईश्वर आप की सोच को सत्य करे
  • author
    Manish Arora
    21 सितम्बर 2019
    Ye toh kavita h👍👍
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    Aditya Dubay
    25 मार्च 2021
    यह Rating लेखक के लिए नहीं प्रतिलिपि के लिए हैं। कविता को लघुकथा में स्थान देने के लिए।
  • author
    Kamlesh Barman
    11 अप्रैल 2020
    सुपर 100%शुध्द ईश्वर आप की सोच को सत्य करे
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    Manish Arora
    21 सितम्बर 2019
    Ye toh kavita h👍👍