pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

" रिश्तों की भाषा "

3706
4.5

" रिश्तों की भाषा " "नहीं समीर, इतना आसान कहां होता है सब कुछ भूल पाना।" वर्षो पहले एक रात अचानक उसे छोड़ कर चले जाने वाला पति आज फिर सामने खड़ा सब भूलने की बात कर रहा था। "तान्या ! मैं मानता हूँ ...