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रानी सारन्धा

4.6
27226

अँधेरी रात के सन्नाटे में धसान नदी चट्टानों से टकराती हुई ऐसी सुहावनी मालूम होती थी जैसे घुमुर-घुमुर करती हुई चक्कियाँ। नदी के दाहिने तट पर एक टीला है। उस पर एक पुराना दुर्ग बना हुआ है जिसको जंगली वृक्षों ने घेर रखा है। टीले के पूर्व की ओर छोटा-सा गाँव है। यह गढ़ी और गाँव दोनों एक बुंदेला सरकार के कीर्ति-चिह्न हैं। शताब्दियाँ व्यतीत हो गयीं बुंदेलखंड में कितने ही राज्यों का उदय और अस्त हुआ मुसलमान आये और बुंदेला राजा उठे और गिरे-कोई गाँव कोई इलाका ऐसा न था जो इन दुरवस्थाओं से पीड़ित न हो मगर इस ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : धनपत राय श्रीवास्तव उपनाम : मुंशी प्रेमचंद, नवाब राय, उपन्यास सम्राट जन्म : 31 जुलाई 1880, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) देहावसान : 8 अक्टूबर 1936 भाषा : हिंदी, उर्दू विधाएँ : कहानी, उपन्यास, नाटक, वैचारिक लेख, बाल साहित्य   मुंशी प्रेमचंद हिन्दी के महानतम साहित्यकारों में से एक हैं, आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाने वाले प्रेमचंद ने स्वयं तो अनेकानेक कालजयी कहानियों एवं उपन्यासों की रचना की ही, साथ ही उन्होने हिन्दी साहित्यकारों की एक पूरी पीढ़ी को भी प्रभावित किया और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी कहानियों की परंपरा कायम की|  अपने जीवनकाल में प्रेमचंद ने 250 से अधिक कहानियों, 15 से अधिक उपन्यासों एवं अनेक लेख, नाटक एवं अनुवादों की रचना की, उनकी अनेक रचनाओं का भारत की एवं अन्य राष्ट्रों की विभिन्न भाषाओं में अन्यवाद भी हुआ है। इनकी रचनाओं को आधार में रखते हुए अनेक फिल्मों धारावाहिकों को निर्माण भी हो चुका है।

समीक्षा
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    पंकज सिंह
    09 ஜனவரி 2020
    बुंदेलखंड की सुनो कहानी बुंदेलों की बानी में, पानीदार यहाँ का पानी,आग यहाँ के पानी। मुझे गर्व है मैं बुंदेलखंड का हूँ.....
  • author
    Vivek Kumar Rajput
    24 நவம்பர் 2018
    निशब्द! मुंशी प्रेमचन्द जी की हर कहानी एक जोश भर देती है। भारत भूमि हमेशा से ऐसे वीर वीरांगनाओ की जननी रही हैं। अान पर मरने वाले वीरों का हमेशा गौरव गान होगा।
  • author
    Neelam Dhyani
    29 ஜனவரி 2019
    इतना सुंदर उच्च साहित्य धन्य हुई मैं। बहुत बहुत आभार ।🙏
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    पंकज सिंह
    09 ஜனவரி 2020
    बुंदेलखंड की सुनो कहानी बुंदेलों की बानी में, पानीदार यहाँ का पानी,आग यहाँ के पानी। मुझे गर्व है मैं बुंदेलखंड का हूँ.....
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    Vivek Kumar Rajput
    24 நவம்பர் 2018
    निशब्द! मुंशी प्रेमचन्द जी की हर कहानी एक जोश भर देती है। भारत भूमि हमेशा से ऐसे वीर वीरांगनाओ की जननी रही हैं। अान पर मरने वाले वीरों का हमेशा गौरव गान होगा।
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    Neelam Dhyani
    29 ஜனவரி 2019
    इतना सुंदर उच्च साहित्य धन्य हुई मैं। बहुत बहुत आभार ।🙏