प्यार की आग सुलगते अंगारे बुझाने को कम है सारी दरिया का पानी, तुम डुबाना चाहते हो आँसूओ के खारे समंदर में ......... मैंने रातों की नदियों में उतारी है कश्ती दिल की, जहाँ माँझी को भी पार जाने का कोई ...

प्रतिलिपिप्यार की आग सुलगते अंगारे बुझाने को कम है सारी दरिया का पानी, तुम डुबाना चाहते हो आँसूओ के खारे समंदर में ......... मैंने रातों की नदियों में उतारी है कश्ती दिल की, जहाँ माँझी को भी पार जाने का कोई ...