प्रिय प्रियतम , इतनी दूर चले गए हो तुम, वहाँ तक मेरी पाती पहुचेगी तो नहीं , जानती हूँ । मेरे हिमशिला खंड बन गए भाव , तुम तक जरूर पहुँच जाएंगे,तभी मेरे नेत्रो से अश्रु बन बह जाए और मैं अपने दर्द से ...

प्रतिलिपिप्रिय प्रियतम , इतनी दूर चले गए हो तुम, वहाँ तक मेरी पाती पहुचेगी तो नहीं , जानती हूँ । मेरे हिमशिला खंड बन गए भाव , तुम तक जरूर पहुँच जाएंगे,तभी मेरे नेत्रो से अश्रु बन बह जाए और मैं अपने दर्द से ...