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प्रेम

4.6
198

तुमको पाने की चाहत में मैं खुद को खोता गया, मैं तेरा नहीं अजनबी खुद का होता गया तू रोक न ले कहीं खुद को इसलिए मैं अंदर ही अंदर रोता गया तेरी मजबूरियों को सोचकर मैं खुद को कोस्ता गया मैं...

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समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

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  • author
    25 मई 2019
    विरह वेदना को स्वयं में समेटे बेहतरीन रचना.....💐💐
  • author
    Shreya Chaturvedi
    25 मई 2019
    bahut sundar rachna 👌💐💐
  • author
    Kanti Kumari
    25 मई 2019
    उम्दा👌👌
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    25 मई 2019
    विरह वेदना को स्वयं में समेटे बेहतरीन रचना.....💐💐
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    Shreya Chaturvedi
    25 मई 2019
    bahut sundar rachna 👌💐💐
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    Kanti Kumari
    25 मई 2019
    उम्दा👌👌