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पिताश्री

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एक हसरत अधूरी रह जाती है,जो बता नही सकता एक उम्र के बाद पुत्र,पिता को गले लगा नही सकता। - पं.अभिषेक शर्मा✍🏻 ...

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ज़ालिम ज़माने में सिर्फ कलम ही अपनी है,और कुछ नही

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