(एक औरत की कहानी) घर की चारदीवारी भी कभी-कभी पिंजरा बन जाती है, जहाँ परिंदे की जगह एक औरत कैद हो जाती है। चेहरे पर मुस्कान, आँखों में ख्वाब, दिल में उड़ान की तमन्ना, फिर भी उसके पंख काट दिए जाते हैं ...

प्रतिलिपि(एक औरत की कहानी) घर की चारदीवारी भी कभी-कभी पिंजरा बन जाती है, जहाँ परिंदे की जगह एक औरत कैद हो जाती है। चेहरे पर मुस्कान, आँखों में ख्वाब, दिल में उड़ान की तमन्ना, फिर भी उसके पंख काट दिए जाते हैं ...