शीशे सा भरा नस नस में उठकर न अब चला जाये। कोई सहारा देकर उठाये खुद से अब न उठा जाये अक्सर सोचा मैंने मय पिये पीना अब छोड़ दिया जाये। जब पीते थे यारों में जीते थे अब तन्हा किधर जिया जाये। आते आते ही ...

प्रतिलिपिशीशे सा भरा नस नस में उठकर न अब चला जाये। कोई सहारा देकर उठाये खुद से अब न उठा जाये अक्सर सोचा मैंने मय पिये पीना अब छोड़ दिया जाये। जब पीते थे यारों में जीते थे अब तन्हा किधर जिया जाये। आते आते ही ...