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नई शूरुआत

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4.6

कुछ बीखरे पलो को संजोना है, अब न एक लम्हा खोना है, गमो का आना-जाना लगा है, मुस्कुराहटो से रिश्ता निभाना है, ढूंढ लिये उजाले बहुत खुद के वास्ते ओंरो की अंधेरी राह मे चिराग जलाना है, कोशिश नही पानी से ...