शब्दों के पिरों के मोती हमने, कुछ यूँ तेरा बखान किया, कमी पडी शब्दों की फिर भी, कुछ यूँ तेरा गुणगान किया ।। नटखट सी बातें, फूलों सी हँसी, और गुस्से में महकती हठधर्मिता, निर्मल सा मन, अल्हड़ सी...

प्रतिलिपिशब्दों के पिरों के मोती हमने, कुछ यूँ तेरा बखान किया, कमी पडी शब्दों की फिर भी, कुछ यूँ तेरा गुणगान किया ।। नटखट सी बातें, फूलों सी हँसी, और गुस्से में महकती हठधर्मिता, निर्मल सा मन, अल्हड़ सी...