ना तुम हमें जानो, ना हम तुम्हें जाने, चलो दरमियान बनाले सबात एक गुमनामी की दीवार, ना तुम मुझे देखना शौक़-ए-उल्फत की नज़रों से, ना मैं तुम्हे देखु गश्त भरी आँखों से, चलो अजनबी बनजये हम दोनो, इल्म ...

प्रतिलिपिना तुम हमें जानो, ना हम तुम्हें जाने, चलो दरमियान बनाले सबात एक गुमनामी की दीवार, ना तुम मुझे देखना शौक़-ए-उल्फत की नज़रों से, ना मैं तुम्हे देखु गश्त भरी आँखों से, चलो अजनबी बनजये हम दोनो, इल्म ...