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मोबाइल व चिट्ठी

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4.3

जब कोई न पास था , दिल बहुत उदास था । मन कुछ कसक रहा था , वक्त नहीं कट रहा था । एक विचार आया ़़़़़, मोबाइल पर हाथ घुमाया । हर एक नाम पढ़ती गई , आगे आगे बढ़ती गई । फिर जाने क्या बात हो गई , कुछ अधिक ...