" ईश्वर ने इंसान को बनया हि ऐसा है कि उसे मोहब्बत हो हि जाती है, वो जब हो लेकीन होती जरुर हैं "
" अच्छा , आपको हुई थी "
" मुझे,,,,,,,,मुझे क्या हुआ था,ये आज तक पता नही चला, पर तु चिंता मत कर ...
भाई शशि रंजन जी बहुत बहुत बधाई और साधुवाद कहानियों कविताओं में में जान डालने के लिए अपनी जान झोंक दी।लेखक के दिल से निकली भावनाएं पाठक के दिल तक अवश्य ही पहुंचती हैं, जो आपकी रचनाओं से स्पष्ट है। किंतु क्षमा करें। आप अपने दिल की भावनाओं से न्याय करते हैं तो हिंदी जो आपकी प्रसिद्धि का आधार है उससे न्याय क्यों नहीं करते? इसी "मेरी मोहब्बत "को पढकर देख लीजिए वर्तनी का क्या बलात्कार किया है आपने। मेरा विनम्र सुझाव है कि भावनाएं व्यक्त करते समय भाषा तथा व्याकरण का भी सम्मान करें। धृष्टता के लिए क्षमाप्रार्थी हू। आपका शुभचिंतक पाठक। शुभकामनाएं।
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भाई शशि रंजन जी बहुत बहुत बधाई और साधुवाद कहानियों कविताओं में में जान डालने के लिए अपनी जान झोंक दी।लेखक के दिल से निकली भावनाएं पाठक के दिल तक अवश्य ही पहुंचती हैं, जो आपकी रचनाओं से स्पष्ट है। किंतु क्षमा करें। आप अपने दिल की भावनाओं से न्याय करते हैं तो हिंदी जो आपकी प्रसिद्धि का आधार है उससे न्याय क्यों नहीं करते? इसी "मेरी मोहब्बत "को पढकर देख लीजिए वर्तनी का क्या बलात्कार किया है आपने। मेरा विनम्र सुझाव है कि भावनाएं व्यक्त करते समय भाषा तथा व्याकरण का भी सम्मान करें। धृष्टता के लिए क्षमाप्रार्थी हू। आपका शुभचिंतक पाठक। शुभकामनाएं।
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