pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है

4.6
1813

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है कुछ जिद्दी, कुछ नक् चढ़ी हो गई है मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है अब अपनी हर बात मनवाने लगी है हमको ही अब वो समझाने लगी है हर दिन नई नई फरमाइशें होती है लगता है कि ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    sonu amit
    25 जुलाई 2018
    bhut aachi kwita hai. mai aupko shubkamna deta hu, aupke agle kwita ka intjar रहेगा.
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    19 अक्टूबर 2015
    फरमाईशें और अजीब जैसे शब्द राष्ट्र भाषा ज्ञान दर्शा रहे हैं । नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    12 जनवरी 2023
    पिता की बहुत ही मनभावन अनुभूति । हार्दिक साधुवाद
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    sonu amit
    25 जुलाई 2018
    bhut aachi kwita hai. mai aupko shubkamna deta hu, aupke agle kwita ka intjar रहेगा.
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    19 अक्टूबर 2015
    फरमाईशें और अजीब जैसे शब्द राष्ट्र भाषा ज्ञान दर्शा रहे हैं । नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    12 जनवरी 2023
    पिता की बहुत ही मनभावन अनुभूति । हार्दिक साधुवाद