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मेरे गाँव की पगडंडी

4.5
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खेतों के बीच सरकती बेरोक चली जाती थी पगडंडी मेरे गाँव की। नहीं बंधन किसी बाँध का पार कर बेधड़क दौड़ पड़ती थी थोड़ी दूर तक सबके साथ। फिर पार करती थी परती जमीनों को खैरा के तथाकथित वनों को गन्ने के खेतों...

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लेखक के बारे में

लेखन जिसके लिए संजीवनी है, पढ़ना असंख्य मनीषियों की संगति, किताबें मंदिर और लेखक उस मंदिर के देव-देवी। कठकरेज’ (कहानी संग्रह) तथा मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली से ‘जिनगी रोटी ना हऽ’ (कविता संग्रह), 'सम्भवामि युगे युगे' (लेख-संग्रह) व 'ऑनलाइन ज़िन्दगी' (कहानी संग्रह) प्रकाशित हो चुकी है। साझा काव्य संग्रह ‘पंच पल्लव’ और 'पंच पर्णिका' का संपादन भी किया है। वर्ण-पिरामिड का साझा-संग्रह ‘अथ से इति-वर्ण स्तंभ’ तथा ‘शत हाइकुकार’ हाइकु साझा संग्रह में आ चुके हैं। साहित्यकार श्री रक्षित दवे द्वारा अनुदित इनकी अट्ठाइस कविताओं को ‘वारंवार खोजूं छुं’ नाम से ‘प्रतिलिपि डाॅट काॅम’ पर ई-बुक भी है। आकाशवाणी और कई टी.वी. चैनलों से निरंतर काव्य-कथा पाठ प्रसारित होते रहने के साथ ही ये अपने गृहनगर में साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ का संयोजन करते रहे हैं। इन्होंने हिंदी टेली फिल्म ‘औलाद, लघु फिल्म ‘लास्ट ईयर’ और भोजपुरी फिल्म ‘कब आई डोलिया कहार’ के लिए पटकथा-संवाद और गीत लिखा है। ये अबतक लगभग तीन दर्जन नाटकों-लघुनाटकों का लेखन और निर्देशन कर चुके हैं। वर्तमान में कई पत्रिकाओं के संपादक मंडल से जुड़े हुए हैं। साल 2002 से हिंदी शिक्षण और पाठ्यक्रम निर्माण में संलग्न हैं तथा वर्तमान में दिल्ली परिक्षेत्र में शिक्षण-कार्य करते हुए स्वतंत्र लेखन करते हैं। ये विश्व-पटल पर छात्रों को आॅनलाइन हिंदी पढ़ाते हैं। राजापुरी, उत्तम-नगर, नई दिल्ली

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    10 अगस्त 2022
    सुंदर सत्य पर आधारित कविता के लिए आपको शत शत नमन
  • author
    शुभम
    08 जनवरी 2018
    पूर्व स्थितियों और वर्तमान को जोड़ती एक सार्थक कविता
  • author
    06 जून 2021
    बहुत उम्दा रचना।
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    Manjit Singh
    10 अगस्त 2022
    सुंदर सत्य पर आधारित कविता के लिए आपको शत शत नमन
  • author
    शुभम
    08 जनवरी 2018
    पूर्व स्थितियों और वर्तमान को जोड़ती एक सार्थक कविता
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    06 जून 2021
    बहुत उम्दा रचना।