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मर जाऊँ क्या?

4.3
2781

आज मैं भी एक गुनाह, कर जाऊँ क्या! कत्ल उनका हो आज, सँवर जाऊँ क्या! समन्दर समेट रखा है जुल्फ़ों में, उन की लटों में बिखर जाऊँ क्या! दूर रहे नजर से अक्सर उन्हें रहा शिकवा, अब आंख की पुतलियों में उतर...

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लेखक के बारे में
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अतुल राय

मैं अदना सा कलमकार हूं,खुद को लिखने की कोशिश जमीन से जुड़े रहकर!

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    arbind Thakur
    12 जून 2018
    बढिया
  • author
    Arun Sharma
    25 मई 2019
    शिमला की खुबसूरती रखने को बरकरार ●● गाजीपुर की तरह मै उजड जाऊं क्या ●●।।
  • author
    Kiran "Kavya"
    02 जनवरी 2019
    behad khubsurat...
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  • author
    arbind Thakur
    12 जून 2018
    बढिया
  • author
    Arun Sharma
    25 मई 2019
    शिमला की खुबसूरती रखने को बरकरार ●● गाजीपुर की तरह मै उजड जाऊं क्या ●●।।
  • author
    Kiran "Kavya"
    02 जनवरी 2019
    behad khubsurat...