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मधुशालाओं की मधुशाला

4.2
618

तेरी आँखों के इस सागर में, इन्हे तक तक डूबा जाता हूँ मै राह चला था सीधी सी, पर तुझमें खोया जाता हूँ तेरी आँखों के इस दरिया से बच कर के निकलना मुश्किल है है तलाश जिसे इन आँखों को कोई और नहीं मेरा दिल ...

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लेखक के बारे में
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नेहा रस्तोगी
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अल्पज्ञ
    01 जुलाई 2023
    बखूबी समेटा है आपने मन के भावों को लफ्ज़ों में। बहुत सुंदर रचना।
  • author
    Bhartendra Sharma
    28 जनवरी 2021
    बहुत उम्दा
  • author
    Deepika Gaur
    12 नवम्बर 2018
    Very nice
  • author
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    अल्पज्ञ
    01 जुलाई 2023
    बखूबी समेटा है आपने मन के भावों को लफ्ज़ों में। बहुत सुंदर रचना।
  • author
    Bhartendra Sharma
    28 जनवरी 2021
    बहुत उम्दा
  • author
    Deepika Gaur
    12 नवम्बर 2018
    Very nice