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लो आज पुनः खामोश हो चली,

4.3
352

लो आज पुनः खामोश हो चली, एक मुखर आवाज़, आंखों में दर्द का समंदर लहर रहा था, जीते जी उसे न समझे जाने का, कष्ट चेहरे पर नज़र आ रहा था। जुबाँ को लकवा मार चुका था, जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे, कुछ ...

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लेखक के बारे में
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रश्मि सिन्हा

मैं रश्मि सिन्हा, लेखिका कह सकते हैं, लेखन की शुरुआत फेस बुक से ही, विभिन्न समूहों से जुड़, कविता , कहानी लेख आदि लिखे, अब फेस बुक पर ही अपने एक ग्रुप के संचालन में व्यस्त। 3 सांझ संकलन, 2 स्वयं की पुस्तकें प्रकाशित , अनगढ़, और उद्गार। अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित, ऑन लाइन और ऑफ लाइन पर लेखन महज एक शौक ,आत्म संतुष्टि का माध्यम , व्यवसाय नही👍 अब अपनी कहानियां और कविताएं और बातें😊 लेकर यूट्यूब चैनल में भी हाजिर कृपया देखे Rashmi sinha kadam dar kadam

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    kuldeep singh
    10 మే 2019
    वाह क्या बात।
  • author
    30 మార్చి 2018
    चर्चाओं में व्यक्ति 2 बार कुछ ज्यादा ही होता है या तो आने के बाद या जाने के बाद
  • author
    Asha Shukla ""Asha""
    19 ఫిబ్రవరి 2019
    बेहतरीन और यथार्थ रचना।
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  • author
    kuldeep singh
    10 మే 2019
    वाह क्या बात।
  • author
    30 మార్చి 2018
    चर्चाओं में व्यक्ति 2 बार कुछ ज्यादा ही होता है या तो आने के बाद या जाने के बाद
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    Asha Shukla ""Asha""
    19 ఫిబ్రవరి 2019
    बेहतरीन और यथार्थ रचना।