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लड़कियां बड़ी हो रहीं हैं

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लड़कियां बड़ी हो रहीं हैं न धूप का पता न छांव का पता अपने में मशगूल है लड़कियां घर के आकाश में सिमटना नहीं चाहती पूरी धरती को बना लेना चाहती हैं घर भीगतीं हैं पहली बारिश में छोड़ती हैं अपना रंग धरती ...