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लड़की हूं ना

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लड़की हूं ना बचपन से समाज का ठेका उठाना सीखा रखा है..... और अपनी इच्छाओं का गला घोंटना तो बचपन से सीखा रखा है.... लड़की हूं ना इसलिए पंख तो उड़ने से पहले ही काट दिए गए .... और खुद के लिए आवाज़ ...

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Preeti Bhatia

प्रीति

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