ये वक्त चींटी की तरह काटता है. कैसे समझाऊँ? स्क्रॉल करते करते रूह बेज़ार हो जाती है , अपने अन्दर की अठन्नी अपना चवन्नी होना स्वीकार नहीं पाती. ये वक्त के केंचुए अक्सर मेरी पीठ पर रेंगते हुए झुरझुरी ...

प्रतिलिपिये वक्त चींटी की तरह काटता है. कैसे समझाऊँ? स्क्रॉल करते करते रूह बेज़ार हो जाती है , अपने अन्दर की अठन्नी अपना चवन्नी होना स्वीकार नहीं पाती. ये वक्त के केंचुए अक्सर मेरी पीठ पर रेंगते हुए झुरझुरी ...