------------------ एम.असलम. टोंक ------------------ "सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते, हर दर पे जो झुक जाए उसे सर नहीं कहते, कहते हैं मोहब्बत फ़क़त उस हाल को 'बिस्मिल' जिस हाल को हम उन से भी ...
बधाई हो! लाल किले की प्राचीर से भी बिस्मिल की शायरी ने दिया था मोहब्बत का पैगाम प्रकाशित हो चुकी है।. अपने दोस्तों को इस खुशी में शामिल करे और उनकी राय जाने।