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कुछ पल रुठ जायेंगे

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कुछ पल रुठ जायेंगे कुछ पल सवर जायेंगे क्यों खफा हो हमसे ऐ तो बताओ । तुम्हारा कहा हर लब्ज आज याद आ रहा हैं । तुमने बहाया हर आंसू मोतियों में बदल रहा हैं । तुझे पता भी हैं कि उस वक्त तुमने क्या...

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लेखक के बारे में

विचारा सुवर्णमध्ये शोधताना मनाच्या गाभाऱ्यात कुठे तरी दडलेली अक्षरांची टोपली खुणावत असते . जेव्हा आपण एक एक अक्षर घेऊन कागदावर ठेवतो तेव्हा कुठे जन्म होतो अगणित शब्दकोषांचा किंवा नवीन कल्पनेचा . या मध्ये स्वतःला शोधताना स्वतःची दमछाक होते.mo.7721099211

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    29 జనవరి 2020
    वाह वाह।मेरी रचनाये भी पढे
  • author
    Kesha Ram
    28 జూన్ 2022
    अतिसुंदर रचना
  • author
    Sumedha Prakash
    09 అక్టోబరు 2018
    वाह वाह
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    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    29 జనవరి 2020
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  • author
    Kesha Ram
    28 జూన్ 2022
    अतिसुंदर रचना
  • author
    Sumedha Prakash
    09 అక్టోబరు 2018
    वाह वाह