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कि मैं एक आवारा पंछी (शायरी)

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✍️ शायरी ➖➖➖ तेरे कूचे से गुजरने की गुस्ताखी हर रोज करता हूँ। कि मैं एक आवारा पंछी... की तरह तेरे दीदार को। शामों शहर भटकता रहता हूँ।                    - ---✍️महेन्द्र मौर्य (02-08-2020) ...