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ख़ुशी

3.3
607

मेरे हिस्से की ख़ुशी आप लाये हैं आज ! लेकिन चाहत हमें तो कल तलक थी तुमने रंग बदला भी तो जाने कब हमने तो झपकी भी न पलक थी वो शख्स ज़रा सी ज़मीं भी न पा सका वो शख्स जिसकी ख्वाहिश फ़लक़ थी हमारा बच्चों की...

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लेखक के बारे में
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अजय शर्मा
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    sunil kujur
    19 अप्रैल 2018
    Bahutttttt badhia
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    sunil kujur
    19 अप्रैल 2018
    Bahutttttt badhia