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खुदा तक नहीं होता!

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जमीं से फकत आसमाँ तक नहीं होता, महोबत का सिला कहाँ तक नहीं होता? यकीनन नजर वाले तो देख ही लेंगे, जमाने को जिसका गुमाँ तक नहीं होता! पलक उठते ही हो गये हल सभी मसले, मजा ये कि हमने पूछा तक नहीं ...