जमीं से फकत आसमाँ तक नहीं होता, महोबत का सिला कहाँ तक नहीं होता? यकीनन नजर वाले तो देख ही लेंगे, जमाने को जिसका गुमाँ तक नहीं होता! पलक उठते ही हो गये हल सभी मसले, मजा ये कि हमने पूछा तक नहीं ...

प्रतिलिपिजमीं से फकत आसमाँ तक नहीं होता, महोबत का सिला कहाँ तक नहीं होता? यकीनन नजर वाले तो देख ही लेंगे, जमाने को जिसका गुमाँ तक नहीं होता! पलक उठते ही हो गये हल सभी मसले, मजा ये कि हमने पूछा तक नहीं ...