चलता रहा मैं उस खोज पर, जिसका मुझे तलाश नही थी , बेवजह ही जिसे मैं अपना समझ बैठा, वो तो पहले से ही मेरी नहीं थी, खुद के मन को समझाता हूं , खुद के जवाबों में उलझे से सवाल करता हूं, आखिर सफर कहाँ है? ...

प्रतिलिपिचलता रहा मैं उस खोज पर, जिसका मुझे तलाश नही थी , बेवजह ही जिसे मैं अपना समझ बैठा, वो तो पहले से ही मेरी नहीं थी, खुद के मन को समझाता हूं , खुद के जवाबों में उलझे से सवाल करता हूं, आखिर सफर कहाँ है? ...