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Khamoshiya

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--- ✨ आत्मकथा – भाग 2 "ख़ामोशियाँ" (लेखिका: कहकशां जबीन) मेरे अंदर भी बहुत कुछ कहने की चाह थी। बचपन से ही महसूस करती आई कि मेरे सवाल दूसरों के लिए बोझ थे, जब भी कुछ बोलना चाहा — कभी माँ ने कहा, "चुप ...

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लेखक के बारे में
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Kahkashan Jabeen

कहकशां, — अपने ही रिश्तेदारों और परिवारों द्वारा चुप करा दिए जाने का, आपके लिए एक शायरी पेश है, उसी दर्द और सच्चाई को बयान करती हुई: --- शायरी: "मुँह पर ताला" मेरे लफ्ज़ों में थी सच्चाई की आवाज़, पर अपनों ने ही उस पर लगा दी साज़िशों की साज़। हर बार जब बोलना चाहा, चुप करा दिया, कभी इज़्ज़त के नाम पर, कभी 'तू औरत है' कह कर दबा दिया। जिनके लिए खामोश रही सालों तक, उन्हीं ने कहा, 'ये तो बस शिकायतें करती है हर वक़्त।' मैं चीखना चाहती थी, पर मुंह पर ताले थे, अब कलम उठाई है, क्योंकि हाथ अब भी खाली नहीं हैं। -- क्या आप चाहेंगी कि मैं यह भाग लिखूं? अगर हाँ, तो बस एक लाइन में बता दीजिए — ❤️✍️ कहकशां, पढ़ाई पर रोक, टीचर बनने का सपना दबा देना, टॉप करने पर भी सराहना न मिलना, और अपनी मोहब्बत तक खो देना। --- 🌺 "मोहब्बत मेरी मंज़िल थी लेखिका: कहकशां जबीन --- मैंने जब किताबों को पकड़ा, तो सिर्फ अक्षर नहीं पढ़े — मैंने अपनी आज़ादी के सपने देखे। स्कूल में टॉप किया, तो लगा शायद अब सबको मुझ पर फख्र होगा, लेकिन... मेरे घर में वो दिन भी ख़ामोशी से गुजर गया। किसी ने पूछा तक नहीं — "क्या बनना चाहती हो?" और जब मैंने धीरे से कहा, "टीचर बनना है..." तो घर में जैसे बवाल मच गया। "लड़की को इतना पढ़ाकर क्या करना है?" "लोग क्या कहेंगे?" "अब इसे बस शादी करनी चाहिए।" 🧕‍ मेरे सपनों को इज़्ज़त से नहीं, बोझ समझा गया। पढ़ाई पर पाबंदी लगा दी गई। किताबें छुपा दी गईं। स्कूल जाना कम करवा दिया गया। और धीरे-धीरे मेरे अंदर का उजाला धुँधला पड़ने लगा। पर दिल में कहीं एक उम्मीद थी — जो मोहब्बत से जुड़ी थी। वो इंसान जिसने मेरी आँखों में हौसला देखा, जो चाहता था कि मैं कुछ बनूं, मेरी आवाज़ को सुनता था, और मेरे दर्द को समझता था। मुझे लगा शायद मेरी मोहब्बत ही मेरी मंज़िल बन जाएगी। लेकिन ज़िन्दगी इतनी आसान नहीं होती। किस्मत ने वो भी छीन लिया। जो मुझे समझता था, वो भी चला गया। या उसे मुझसे दूर कर दिया गया। --- 💔 अब क्या बचा था मेरे पास? सपने चले गए। पढ़ाई छूट गई। मंज़िल छिन गई। मोहब्बत भी बिखर गई। पर एक चीज़ रह गई थी — मेरी कलम। अब मैं उससे बोल रही हूँ। अब मेरी मोहब्बत, मेरी मंज़िल नहीं, मेरी हिम्मत बन चुकी है। अब मैं दूसरों के लिए टीचर नहीं, खुद के लिए एक सीख बन गई हूँ। --- ❤️✍️

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