pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

कातिल आंखें

16
5

*  क्या कशिश है इन आंखों की गहराई में,,    जी करता है इन्हीं में डूब के मर जाए। *  लोग जाते होंगे नशा करने मैखानों में,,    हमें तो नशीली आंखों से ही नशा चढ़ जाए। *  यूं तो बदनाम है साकी शराब ...