* क्या कशिश है इन आंखों की गहराई में,, जी करता है इन्हीं में डूब के मर जाए। * लोग जाते होंगे नशा करने मैखानों में,, हमें तो नशीली आंखों से ही नशा चढ़ जाए। * यूं तो बदनाम है साकी शराब ...

प्रतिलिपि* क्या कशिश है इन आंखों की गहराई में,, जी करता है इन्हीं में डूब के मर जाए। * लोग जाते होंगे नशा करने मैखानों में,, हमें तो नशीली आंखों से ही नशा चढ़ जाए। * यूं तो बदनाम है साकी शराब ...