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कसूमल रंग

1206
4.2

महानगर की चहल - पहल में मेरे आगे कई तरह के मौन - मुखर प्रेम गुज़रते रहे हैं, कई महान प्रेम मेरे सामने - सामने ही अपनी चमक खो बैठे. दो बरस पहले आंख के आगे गुज़रा वह प्रेम आज भी जब याद आता है, तो सारे ...