महानगर की चहल - पहल में मेरे आगे कई तरह के मौन - मुखर प्रेम गुज़रते रहे हैं, कई महान प्रेम मेरे सामने - सामने ही अपनी चमक खो बैठे. दो बरस पहले आंख के आगे गुज़रा वह प्रेम आज भी जब याद आता है, तो सारे ...
महानगर की चहल - पहल में मेरे आगे कई तरह के मौन - मुखर प्रेम गुज़रते रहे हैं, कई महान प्रेम मेरे सामने - सामने ही अपनी चमक खो बैठे. दो बरस पहले आंख के आगे गुज़रा वह प्रेम आज भी जब याद आता है, तो सारे ...