ऊफ क्या नशीली आंखे पायी हैं तुमने ..यूं तो सभी आंखो को शायरों ने मयखाना ही कहा है तो क्या गलत कहा है ..बहुत तरह की आँखें पाई जाती हैं मगर सब की सब एक जैसी नशीली नहीं होती और सभी की पसंद अलग अलग हुआ ...

प्रतिलिपिऊफ क्या नशीली आंखे पायी हैं तुमने ..यूं तो सभी आंखो को शायरों ने मयखाना ही कहा है तो क्या गलत कहा है ..बहुत तरह की आँखें पाई जाती हैं मगर सब की सब एक जैसी नशीली नहीं होती और सभी की पसंद अलग अलग हुआ ...