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काश मैं कोई कविता होता कोई कवि मुझे भी रचता रोज नए रंगों में रंगता कभी पुष्प सा वन में खिलता बनकर गगन जगत को ढकता साहस और अडिगता बनकर उर में वीरों के अलख जगाता हास्य-वयंग के शब्दों में ...