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कामना

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4.3

हमारे रिश्ते के बीच ऊब में डूबते तमाम पुल टूट जाने से पहले खो जाना चाहती हूँ मंझधार में, शायद कभी कभी डूबना, पार लगने से कहीं ज्यादा पुरसुकून होता है, बेपरवाह गुजरने की ख्वाहिश उँगली थामे है उन ...