<p>सघन संवेदनात्मकता और चुनौतीपूर्ण कथाविन्यास के कारण समकालीन कथाजगत में सार्थक हस्तक्षेप करनेवाली जयश्री रॉय भूमंडलोत्तर कथा-पीढ़ी की एक सुपरिचित कथाकार हैं। `अनकही', `तुम्हें छू लूँ जरा', `खारा पानी' और `कायान्तर' नामक चार कथा-संग्रहों तथा `औरत जो नदी है', `साथ चलते हुये' और `इकबाल' शीर्षक तीन उपन्यासों के बीच फैला उनका रचना-संसार स्त्री-पुरुष संबंधों में व्याप्त जटिलताओं को तो बारीकी से विश्लेषित करता ही हैं, समय और समाज के हाशिये पर जीने को अभिशप्त लोक-समूहों के जीवन-संघर्ष और स्व्प्नों को भी एक सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करता है।</p>
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<p>जयश्री रॉय का जन्म दिनांक 18 मई को तत्कालीन बिहार (अब झारखंड) के हजारीबाग में हुआ था। माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा बिहार में ग्रहण करने के बाद इन्होंने गोवा विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और गोवा के प्रतिष्ठित सेंटजेवीयर्स कॉलेज तथा गवर्नमेंट कॉलेज, पेडने में कुछ समय तक अध्यापन कार्य भी किया। बिहार के लोक-रंग की खुशबू और वहां का जीवन-संघर्ष इनकी स्मृतियों और सरोकारों से गहरे जुड़े हैं जिसकी अर्थपूर्ण उपस्थिति इनकी कहानियों में सहज ही देखी जा सकती है। साथ ही गोवा की लोक-संस्कृति, पर्यावरण, रहन-सहन, और यहां की समकालीन सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का प्रामाणिक विश्लेषण भी इनके रचना-संसार की उल्लेखनीय विशेषता है।</p>
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<p>संक्षेप में, अपनी काव्यात्मक भाषा तथा विविधवर्णी अर्थगर्भी विषय-संदर्भों के कारण जयश्री रॉय की कहानियां मानवीय संवेदनाओं और सपनों के सहज आस्वाद का रससिक्त उपक्रम तथा सनसनी के बिरुद्ध बेचैनी और ऐन्द्रिकता के विरुद्ध सूक्ष्मग्राह्यता की बेवाक गवाहियां हैं।</p>
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<p>संपर्क : तीन माड, मायना, शिवोली, गोवा - 403 517</p>
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<p>मो. : 09822581137</p>
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<p>ई-मेल : <a href="mailto:[email protected]">[email protected]</a></p>
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