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काली-कलूटी

4.0
449050

बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद करके उसने अपने कपड़े उतारकर खूँटी पर टाँग दिए थे। छोटे-से बाथरूम में ठीक से खड़े होने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं थी। एक कोने को घेरकर बड़ा चहबच्चा था और दीवार पर कुछ कीलें ...

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लेखक के बारे में
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जयश्री रॉय

सघन संवेदनात्मकता और चुनौतीपूर्ण कथाविन्यास के कारण समकालीन कथाजगत में सार्थक हस्तक्षेप करनेवाली जयश्री रॉय भूमंडलोत्तर कथा-पीढ़ी की एक सुपरिचित कथाकार हैं। `अनकही', `तुम्हें छू लूँ जरा', `खारा पानी' और `कायान्तर' नामक चार कथा-संग्रहों तथा `औरत जो नदी है', `साथ चलते हुये' और `इकबाल' शीर्षक तीन उपन्यासों के बीच फैला उनका रचना-संसार स्त्री-पुरुष संबंधों में व्याप्त जटिलताओं को तो बारीकी से विश्लेषित करता ही हैं, समय और समाज के हाशिये पर जीने को अभिशप्त लोक-समूहों के जीवन-संघर्ष और स्व्प्नों को भी एक सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करता है। जयश्री रॉय का जन्म दिनांक 18 मई को तत्कालीन बिहार (अब झारखंड) के हजारीबाग में हुआ था। माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा बिहार में ग्रहण करने के बाद इन्होंने गोवा विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और गोवा के प्रतिष्ठित सेंटजेवीयर्स कॉलेज तथा गवर्नमेंट कॉलेज, पेडने में कुछ समय तक अध्यापन कार्य भी किया। बिहार के लोक-रंग की खुशबू और वहां का जीवन-संघर्ष इनकी स्मृतियों और सरोकारों से गहरे जुड़े हैं जिसकी अर्थपूर्ण उपस्थिति इनकी कहानियों में सहज ही देखी जा सकती है। साथ ही गोवा की लोक-संस्कृति, पर्यावरण, रहन-सहन, और यहां की समकालीन सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का प्रामाणिक विश्लेषण भी इनके रचना-संसार की उल्लेखनीय विशेषता है। संक्षेप में, अपनी काव्यात्मक भाषा तथा विविधवर्णी अर्थगर्भी विषय-संदर्भों के कारण जयश्री रॉय की कहानियां मानवीय संवेदनाओं और सपनों के सहज आस्वाद का रससिक्त उपक्रम तथा सनसनी के बिरुद्ध बेचैनी और ऐन्द्रिकता के विरुद्ध सूक्ष्मग्राह्यता की बेवाक गवाहियां हैं। संपर्क : तीन माड, मायना, शिवोली, गोवा - 403 517 मो. : 09822581137 ई-मेल : [email protected]

समीक्षा
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  • author
    Ankita Dewan
    18 ജൂണ്‍ 2018
    कहानी में अपने लावण्या का बहुत ही खराब दिखा दिया..आपके HISAAB SE TOH SAARI KALI LADKIYO KI AISI HI DASHA HOTI HAI.....AGAR KOI KALI LADKI IS KAHANI KO PADHE TOH US PER KYA GUJREGI APNE SOCHA KABHI...ARE KAHANI LIKH HI RAHI THI TOH KUCH PRENA BHARA LIKHTI..KI LAVANYA NE JEE JAAN SE PADHAI KI EK MUKAAM HASIL KIYA BACCHA GOD LE LIYE..USE KABIL BANAYA..YEH KYA KI SHADI NAHI HUI SIRF ISLIYE LAVANYA PAGAL HO GAYI..PLEASE AISI BAKWAS NAA LIKHA KARE..
  • author
    Kamlesh Vajpeyi
    05 മെയ്‌ 2018
    बहुत सुन्दर कहानी, वर्तमान की वास्तविकता उजागर करती हुई, यदि अन्त कुछ सुखान्त होता तो !.. मन बोझिल न होता !
  • author
    Deepak SINGLA
    08 ജൂണ്‍ 2019
    ये कहानी नही एक लड़की के जीवन का वो अनदेखा भाग है जिससे कुछ ही लोग परीचित है। इस अद्भुत रचना के लिए लेखक का दिल से आभार शुभकामनाएं
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    Ankita Dewan
    18 ജൂണ്‍ 2018
    कहानी में अपने लावण्या का बहुत ही खराब दिखा दिया..आपके HISAAB SE TOH SAARI KALI LADKIYO KI AISI HI DASHA HOTI HAI.....AGAR KOI KALI LADKI IS KAHANI KO PADHE TOH US PER KYA GUJREGI APNE SOCHA KABHI...ARE KAHANI LIKH HI RAHI THI TOH KUCH PRENA BHARA LIKHTI..KI LAVANYA NE JEE JAAN SE PADHAI KI EK MUKAAM HASIL KIYA BACCHA GOD LE LIYE..USE KABIL BANAYA..YEH KYA KI SHADI NAHI HUI SIRF ISLIYE LAVANYA PAGAL HO GAYI..PLEASE AISI BAKWAS NAA LIKHA KARE..
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    Kamlesh Vajpeyi
    05 മെയ്‌ 2018
    बहुत सुन्दर कहानी, वर्तमान की वास्तविकता उजागर करती हुई, यदि अन्त कुछ सुखान्त होता तो !.. मन बोझिल न होता !
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    Deepak SINGLA
    08 ജൂണ്‍ 2019
    ये कहानी नही एक लड़की के जीवन का वो अनदेखा भाग है जिससे कुछ ही लोग परीचित है। इस अद्भुत रचना के लिए लेखक का दिल से आभार शुभकामनाएं