झरना और पर्वत आपस में टकराये रस्ते पर। पर्वत अकड़ के बोला झरने, चलना राह बचाकर॥ मुझसे जो टकराये बेटा, चूर-चूर हो जाये। तेरी क्या औकात है जो तू मेरे रस्ते पर आये॥ अकड़ भरी थी पर्वत में, झरना है प्यार का ...

प्रतिलिपिझरना और पर्वत आपस में टकराये रस्ते पर। पर्वत अकड़ के बोला झरने, चलना राह बचाकर॥ मुझसे जो टकराये बेटा, चूर-चूर हो जाये। तेरी क्या औकात है जो तू मेरे रस्ते पर आये॥ अकड़ भरी थी पर्वत में, झरना है प्यार का ...