रुपया पैसा धन और दौलत जीवन का क्या बस सार यही ये चक्रवात धर्म अर्थ काम का इसका क्या कोई पार नहीं ? क्या जीवन बस पाना ही है अनवरत चले जाना ही है, ये अंतहीन पगडण्डी जो इसका क्या कोई पार नहीं ? क्या समय ...

प्रतिलिपिरुपया पैसा धन और दौलत जीवन का क्या बस सार यही ये चक्रवात धर्म अर्थ काम का इसका क्या कोई पार नहीं ? क्या जीवन बस पाना ही है अनवरत चले जाना ही है, ये अंतहीन पगडण्डी जो इसका क्या कोई पार नहीं ? क्या समय ...